सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

रेडियोसॉन्ड : जब पृथ्वी आसमान से सवाल पूछती है

  रेडियोसॉन्ड : जब पृथ्वी आसमान से सवाल पूछती है हर दिन हम मौसम की भविष्यवाणी सुनते हैं — आज बारिश होगी, तापमान बढ़ेगा, हवा तेज़ चलेगी। लेकिन एक ईमानदार सवाल है: आख़िर मौसम की जानकारी आती कहाँ से है? उपग्रह? हाँ। कंप्यूटर मॉडल? बिल्कुल। लेकिन इन सबकी नींव जिस एक उपकरण पर टिकी है, वह है — रेडियोसॉन्ड (Radiosonde) । रेडियोसॉन्ड वह वैज्ञानिक संदेशवाहक है जो हर दिन चुपचाप गुब्बारे के साथ आसमान में जाता है और पृथ्वी को बताता है कि ऊपर क्या चल रहा है। 🌍 रेडियोसॉन्ड क्या है? रेडियोसॉन्ड एक मौसम मापन उपकरण है जिसे एक बड़े हीलियम या हाइड्रोजन गुब्बारे के साथ ऊपरी वायुमंडल में छोड़ा जाता है। यह उड़ान के दौरान लगातार मापता है: तापमान (Temperature) वायुदाब (Pressure) आर्द्रता (Humidity) हवा की दिशा और वेग (Wind) और यह सारा डेटा रेडियो तरंगों के माध्यम से पृथ्वी पर स्थित रिसीविंग स्टेशन को भेजता रहता है। 🤔 ज़मीन से मौसम क्यों नहीं मापा जा सकता? ज़मीन पर खड़े होकर हम केवल नीचे की हवा को महसूस करते हैं। लेकिन मौसम की ...

ओजोनसॉन्ड : आसमान में छोड़ा गया एक वैज्ञानिक जासूस

  ओजोनसॉन्ड : आसमान में छोड़ा गया एक वैज्ञानिक जासूस हम रोज़ सूरज की रोशनी में चलते हैं, खेलते हैं, पढ़ते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) से हमें कौन बचाता है? उत्तर है — ओजोन परत । और इस ओजोन परत की सेहत जाँचने के लिए जो यंत्र आसमान में भेजा जाता है, उसे कहते हैं ओजोनसॉन्ड (Ozonesonde) । 🧠 ओजोनसॉन्ड क्या है? ओजोनसॉन्ड एक वैज्ञानिक उपकरण है जिसे मौसम गुब्बारे (Weather Balloon) के साथ ऊपरी वायुमंडल में भेजा जाता है। यह पृथ्वी की सतह से लेकर लगभग 30–35 किलोमीटर ऊँचाई तक ओजोन गैस की मात्रा को मापता है। 👩‍🔬 ओजोनसॉन्ड किसने बनाया? ओजोनसॉन्ड केवल एक उपकरण नहीं है, यह उस वैज्ञानिक सोच का परिणाम है जिसने भारत को मौसम विज्ञान में आत्मनिर्भर बनने की दिशा दी। भारत में ओजोनसॉन्ड के विकास और मानकीकरण में डॉ. अन्ना मणि की भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने न केवल मौसम मापन यंत्रों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढाला, बल्कि ओजोन मापन को वैज्ञानिक विश्वसनीयता दी — ताकि डेटा केवल संख्...

भारत के वैज्ञानिक रत्न : अन्ना मणि — जिसने मौसम को पढ़ना सिखाया

  भारत के वैज्ञानिक रत्न : अन्ना मणि — जिसने मौसम को पढ़ना सिखाया जब हम “वैज्ञानिक” शब्द सुनते हैं, तो दिमाग में अक्सर प्रयोगशाला, समीकरण और जटिल मशीनों की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मौसम — हवा, बारिश, धूप, बादल — इन सबको समझने के पीछे कौन लोग होते हैं? आज हम जिस वैज्ञानिक रत्न की बात करने जा रहे हैं, वह न तो रॉकेट बना रही थीं, न ही परमाणु रिएक्टर। फिर भी उनका काम हर किसान, हर पायलट, हर वैज्ञानिक और हर आम नागरिक के जीवन से जुड़ा है। 🌦️ यह कहानी है — डॉ. अन्ना मणि की 🔍 विज्ञान से प्रेम, समाज से संवाद अन्ना मणि का जन्म 1918 में केरल में हुआ। बचपन से ही वे सवाल पूछती थीं — क्यों? क्यों बारिश समय पर नहीं होती? क्यों हवा कभी शांत और कभी उग्र हो जाती है? यह जिज्ञासा उन्हें मौसम विज्ञान (Meteorology) तक ले गई — एक ऐसा क्षेत्र जिसे अक्सर “पूर्वानुमान” तक सीमित समझ लिया जाता है, जबकि असल में यह भौतिकी, गणित और उपकरण-निर्माण का अद्भुत संगम है। 🧪 विज्ञान केवल किताबों में नहीं होता अन्ना मणि का सबसे बड़ा योगदान था — मौसम मापने...

SAR Interferometry क्या है?

  SAR Interferometry क्या है? जब दो रडार तस्वीरें मिलकर धरती की हलचल बता देती हैं मान लीजिए आप किसी शांत कमरे में खड़े हैं। फर्श बिल्कुल स्थिर लगता है। लेकिन अगर आपको बताया जाए कि वही फर्श मिलीमीटर के अंश जितना हिल रहा है — तो आप शायद हँस दें। यही वह बिंदु है जहाँ SAR Interferometry मानव इंद्रियों की सीमा को तोड़ देती है। पहले SAR को समझें — बिना SAR, Interferometry नहीं SAR का मतलब है: Synthetic Aperture Radar यह साधारण कैमरे की तरह रोशनी नहीं देखता। यह: खुद रेडियो तरंगें भेजता है उन्हें धरती से टकराकर वापस आते देखता है और समय + phase का विश्लेषण करता है इसका फायदा: दिन–रात कोई फर्क नहीं बादल, धुआँ, बारिश बाधा नहीं धरती की बनावट और नमी साफ़ दिखती है लेकिन अभी तक यह सिर्फ “एक समय की तस्वीर” थी। असली जादू तब शुरू होता है जब दो समय की SAR तस्वीरें मिलती हैं। Interferometry का मूल विचार — अंतर से सूचना Interferometry शब्द ही संकेत देता है: Interference = तरंगों का हस्तक्षेप जब दो SAR पास (passes...

NISAR Data कैसे पढ़ते हैं?

  NISAR Data कैसे पढ़ते हैं? तस्वीरें नहीं, संकेत — और संकेतों की भाषा जब NISAR धरती को स्कैन करता है, तो वह कोई सुंदर फोटो नहीं भेजता। वह भेजता है — संख्याएँ, तरंगें, फेज़ अंतर और रंगीन पैटर्न । पहली नज़र में यह डेटा अव्यवस्थित लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह धरती की डायरी होती है। सबसे पहले भ्रम तोड़ें: NISAR image ≠ camera photo NISAR की “तस्वीरें” असल में तस्वीरें नहीं हैं। यह Radar Echo Map होती हैं — जहाँ हर पिक्सेल यह बताता है कि: रेडार तरंग कितनी तेज़ लौटी लौटने में कितना समय लगा तरंग का phase कितना बदला यानी — यह आँख से नहीं, गणित से देखना है। Step 1: Backscatter Image पढ़ना NISAR डेटा की पहली परत होती है: Backscatter Intensity सरल भाषा में: ज़्यादा चमकीला = ज़्यादा सिग्नल लौटा गहरा रंग = कम सिग्नल लौटा लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि: चमकीला = ऊँचा गहरा = नीचा बल्कि यह निर्भर करता है: सतह कितनी खुरदरी है नमी कितनी है वनस्पति कितनी घनी है यही कारण है कि सूखी ज़मीन और गीली ज...

क्या NISAR भूकंप की भविष्यवाणी कर पाएगा?

  क्या NISAR भूकंप की भविष्यवाणी कर पाएगा? एक वैज्ञानिक सवाल, एक अधूरा सपना और धरती की चुप भाषा हर बार जब ज़मीन हिलती है, हम यही पूछते हैं — “पहले क्यों नहीं पता चला?” भूकंप के बाद सबसे बड़ा दुख नुकसान का नहीं होता, बल्कि इस एहसास का होता है कि अगर कुछ मिनट, कुछ दिन, या कुछ हफ्ते पहले चेतावनी मिल जाती — तो तस्वीर अलग हो सकती थी। इसी उम्मीद के केंद्र में आज एक नाम है: NISAR पहले एक सच्चाई: भूकंप की भविष्यवाणी इतनी कठिन क्यों है? भूकंप मौसम नहीं है। धरती की टेक्टोनिक प्लेटें कोई घड़ी की सुइयाँ नहीं, जो तय समय पर फिसलें। वे विशाल चट्टानें हैं — अपूर्ण, असमान और अरबों टन दबाव में। भूकंप तब आता है जब: दो प्लेटें लंबे समय तक एक-दूसरे से अटकी रहती हैं अंदर तनाव जमा होता रहता है और अचानक — वह लॉक टूट जाता है समस्या यह है: हम अंदर झाँक नहीं सकते। तो NISAR यहाँ क्यों अलग है? NISAR धरती के अंदर नहीं देखता। वह कुछ और करता है — वह धरती की सतह की हर सूक्ष्म प्रतिक्रिया को सुनता है। जब अंदर तनाव बढ़ता है, तो ज़मीन: कहीं बह...

NISAR से हाल की खोजें

  NISAR से हाल की खोजें: जब धरती ने अपने छिपे संकेत दिखाने शुरू किए NISAR को लॉन्च हुए ज़्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन इस सैटेलाइट ने एक बात साफ़ कर दी है — धरती जितनी शांत दिखती है, उतनी है नहीं। जहाँ पारंपरिक सैटेलाइट केवल तस्वीरें दिखाते हैं, वहीं NISAR धरती की गति, तनाव और बदलाव को मापता है — और यही वजह है कि इसकी शुरुआती खोजें ही वैज्ञानिकों को चौंका रही हैं। 1. जमीन की मिलीमीटर-स्तरीय हलचल का पहला वैश्विक नक्शा NISAR से प्राप्त शुरुआती डेटा ने यह दिखाया कि कई ऐसे क्षेत्र, जिन्हें स्थिर माना जाता था, असल में धीरे-धीरे खिसक रहे हैं। उदाहरण: कुछ तटीय शहर हर साल मिलीमीटर स्तर पर नीचे धँस रहे हैं नदियों के डेल्टा क्षेत्रों में जमीन की “सांस लेने जैसी” गति पुराने फॉल्ट ज़ोन, जो निष्क्रिय माने जाते थे, उनमें सूक्ष्म गतिविधि यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों को पूरी धरती का एक साथ “Deformation Map” मिल रहा है। 2. भूकंप से पहले के तनाव संकेत (Pre-Seismic Signals) भूकंप अचानक नहीं होते — वे जमीन के भीतर तनाव जमा होने का परिणाम होते ह...

सूक्ष्मजीवों के प्रकार: जीवन के इतिहास

सूक्ष्मजीवों के प्रकार: जीवन के इतिहास के अदृश्य लेखक मानव सभ्यता ने लंबे समय तक स्वयं को पृथ्वी का केंद्र समझा। हमें लगा कि जीवन का इतिहास हमारी आँखों से दिखने वाले पौधों, पशुओं और अंततः मनुष्य से शुरू होता है। लेकिन आधुनिक जीवविज्ञान ने इस आत्मविश्वास को धीरे-धीरे तोड़ा। माइक्रोस्कोप के नीचे खुलने वाला संसार यह बताता है कि जीवन का अधिकांश इतिहास, अधिकांश विविधता और अधिकांश प्रभाव उन जीवों के हाथों में है जिन्हें हम सूक्ष्मजीव कहते हैं। यह लेख सूक्ष्मजीवों को केवल जैविक श्रेणियों में बाँटने का प्रयास नहीं है। यह उन्हें वैज्ञानिक विचारों, दार्शनिक प्रश्नों और पृथ्वी के इतिहास के सक्रिय पात्रों के रूप में देखने का आमंत्रण है। विषयसूची सूक्ष्मजीव: आकार नहीं, संगठन वर्गीकरण की वैचारिक समस्या जीवाणु: रासायनिक मशीनें विषाणु: जीवन की सीमा पर कवक: अपघटन और पुनर्निर्माण प्रोटोजोआ: एक कोशिका, अनेक व्यवहार शैवाल: प्रकाश से इतिहास आर्किया: प्रारंभिक पृथ...

समय क्या है? – Time Dilation और Relativity का गहरा विज्ञान

  समय क्या है? – Time Dilation और Relativity का गहरा विज्ञान क्या समय हर जगह एक-सा चलता है? क्या अंतरिक्ष में जाकर समय धीमा हो सकता है? Einstein ने 1905 में जो उत्तर दिया, उसने हमारे ब्रह्मांड की समझ ही बदल दी। 📌 Table of Contents समय की पारंपरिक धारणा Einstein का क्रांतिकारी विचार Time Dilation क्या है? Mathematical Derivation हल किया हुआ Numerical Example Real Life Examples Space & Astronomy में Time Dilation Black Hole के पास समय Why Time is not Absolute Frequently Asked Questions 1️⃣ समय की पारंपरिक धारणा Newtonian physics में समय को absolute माना जाता था — यानी ब्रह्मांड के हर कोने में समय समान गति से बहता है। रोचक तथ्य: Newton के लिए समय एक ऐसी घड़ी था जो पूरे ब्रह्मांड के ऊपर टंगी है। 2️⃣ Einstein का क्रांतिकारी विचार Einstein ने Special Relativity में कहा: समय और स्थान अलग-अलग नहीं हैं, वे मिलकर Space-Time बनाते हैं। और सबसे चौंकाने वाली बात — समय observer की गति और gravity पर निर्भर करता है। 3️⃣ Time Dilation क्या...

तारे कैसे जन्म लेते हैं और कैसे मरते हैं?

  तारे कैसे जन्म लेते हैं और कैसे मरते हैं? तारों का जीवन चक्र (Stellar Life Cycle) खगोल विज्ञान का वह विषय है जो यह बताता है कि तारे कैसे बनते हैं, ऊर्जा कैसे उत्पन्न करते हैं और अंततः कैसे नष्ट होते हैं। यह प्रक्रिया केवल खगोलीय सौंदर्य नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण (Gravitation), नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion), क्वांटम यांत्रिकी और सापेक्षता सिद्धांत का संयुक्त परिणाम है। इस विस्तृत STEM Hindi पोस्ट में हम तारों के जन्म से लेकर उनकी मृत्यु तक की यात्रा को समीकरणों, वास्तविक खगोलीय उदाहरणों और Chandrasekhar Limit जैसे निर्णायक सिद्धांतों के साथ समझेंगे। 📌 विषय सूची (Table of Contents) 1. Nebula से तारे का जन्म 2. Protostar और Virial Theorem 3. Main Sequence और Nuclear Fusion 4. Red Giant और Heavy Elements 5. तारे की मृत्यु और Chandrasekhar Limit 6. White Dwarf, Neutron Star और Black Hole FAQs 1. Nebula से तारे का जन्म हर तारे की शुरुआत Nebula से होती है — यह गैस (मुख्यतः हाइड्रोजन) और धूल का विशाल बादल होता है। जब किसी बाहरी कारण (जैसे पास की सुपरन...

आपात सेवाओं में विज्ञान, तकनीक और मानव जीवन की सुरक्षा

UP-112 में Android Emergency Location Service (ELS): आपात सेवाओं में विज्ञान, तकनीक और मानव जीवन की सुरक्षा Android Emergency Location Service (ELS) को उत्तर प्रदेश की UP-112 आपात सेवा में लागू किया जाना भारत की आपात प्रतिक्रिया प्रणाली में एक ऐतिहासिक तकनीकी प्रगति है। यह तकनीक आपात स्थिति में कॉल करने वाले व्यक्ति की सटीक लोकेशन स्वतः साझा कर प्रतिक्रिया समय को नाटकीय रूप से कम करती है। सड़क दुर्घटना, मेडिकल इमरजेंसी, आग या अपराध जैसी स्थितियों में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। ELS का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक के माध्यम से जीवन रक्षक निर्णयों को तेज़ और सटीक बनाना है। यही कारण है कि यह विषय इस सप्ताह STEM और टेक्नोलॉजी जगत में ट्रेंड कर रहा है। Emergency Location Service (ELS) क्या है? Emergency Location Service (ELS) एक Google-विकसित लोकेशन तकनीक है, जो Android स्मार्टफोन से किए गए आपात कॉल (जैसे 112) के दौरान कॉलर की भौगोलिक स्थिति स्वतः आपात नियंत्...

विकास का सिद्धांत: जीवन कैसे बदला, ढला और आगे बढ़ा

  विकास का सिद्धांत: जीवन कैसे बदला, ढला और आगे बढ़ा यह लेख STEM Hindi जीव विज्ञान केंद्र की गहन जीवविज्ञान श्रृंखला का हिस्सा है। यदि आपने जीन अभिव्यक्ति और म्यूटेशन से जुड़े लेख पढ़े हैं, तो यह अध्याय उन्हें एक बड़े चित्र में जोड़ता है। विषय-सूची जीवन स्थिर नहीं है लामार्क का विकास सिद्धांत डार्विन और प्राकृतिक चयन विकास का गणित आधुनिक विकास सिद्धांत विकास के प्रमाण मानव विकास निष्कर्ष 1. जीवन स्थिर नहीं है यदि जीवन स्थिर होता, तो पृथ्वी आज भी एककोशिकीय जीवों से भरी होती। न पंख होते, न आँखें, न मस्तिष्क — और न ही मनुष्य। जीवन का सबसे गहरा सत्य यह है कि जीवन बदलता है । धीरे-धीरे, पीढ़ी दर पीढ़ी — यही परिवर्तन विकास (Evolution) कहलाता है। विकास कोई राय नहीं, कोई विश्वास नहीं, बल्कि जीवविज्ञान का वह ढांचा है जो जीन, म्यूटेशन और पर्यावरण को एक ही कहानी में पिरो देता है। 2. लामार्क का विकास सिद्धांत Jean-Baptiste Lamarck पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने यह कहा कि जीव समय के साथ बदलते हैं। लामार्क के दो मुख्य नियम: 1. उपयोग औ...

हार्डी–वेनबर्ग सिद्धांत

  होम › जीवविज्ञान हब    › हार्डी–वेनबर्ग सिद्धांत हार्डी–वेनबर्ग सिद्धांत (Hardy–Weinberg Principle) कल्पना कीजिए एक ऐसी आबादी की जहाँ विकास ने छुट्टी ले रखी हो। कोई प्राकृतिक चयन नहीं, कोई उत्परिवर्तन नहीं, कोई प्रवासन नहीं। ऐसी आदर्श दुनिया में जीन आवृत्तियाँ (gene frequencies) क्या स्थिर रहती हैं? यही प्रश्न हार्डी–वेनबर्ग सिद्धांत का जन्म है।  सिद्धांत का कथन यदि कोई जनसंख्या निम्न शर्तों को पूरा करती है: आबादी बहुत बड़ी हो (Large population) यादृच्छिक संकरण हो (Random mating) कोई उत्परिवर्तन न हो (No mutation) कोई प्रवासन न हो (No migration) कोई प्राकृतिक चयन न हो (No natural selection) तो उस जनसंख्या में allele frequencies और genotype frequencies पीढ़ी दर पीढ़ी स्थिर रहती हैं। गणितीय व्युत्पत्ति (Full Derivation) चरण 1: Alleles की परिभाषा मान लीजिए किसी जीन के दो alleles हैं: $A$ की आवृत्ति = $p$ $a$ की आवृत्ति = $q$ क्योंकि केवल दो ही alleles हैं: $\displaystyle p + q = 1$ चरण 2:...

इलेक्ट्रॉन ऑर्बिटल क्या होते हैं? – Schrödinger मॉडल की सरल और गहरी व्याख्या

  होम › रसायन विज्ञान हब › इलेक्ट्रॉन ऑर्बिटल इलेक्ट्रॉन ऑर्बिटल क्या होते हैं? – Schrödinger मॉडल की सरल और गहरी व्याख्या पिछली पोस्ट में हमने देखा कि बोहर मॉडल क्यों असफल हुआ। अब सवाल स्वाभाविक है — अगर इलेक्ट्रॉन कक्षा में नहीं घूमता, तो वह वास्तव में होता कहाँ है? इस सवाल का उत्तर किसी चित्र या साधारण नियम में नहीं, बल्कि एक समीकरण में छिपा था — जिसने पदार्थ को देखने का तरीका ही बदल दिया। 📌 Table of Contents कक्षा से ऑर्बिटल तक की यात्रा Schrödinger समीकरण का विचार Wave function (ψ) का वास्तविक अर्थ ψ² और Probability Density ऑर्बिटल क्या है और क्या नहीं s, p, d, f ऑर्बिटल की कल्पना प्रयोगात्मक प्रमाण क्यों यह मॉडल सही है 1️⃣ कक्षा से ऑर्बिटल तक की यात्रा बोहर मॉडल में इलेक्ट्रॉन एक निश्चित वृत्ताकार कक्षा में घूमता था, बिल्कुल ग्रहों की तरह। लेकिन क्वांटम यांत्रिकी ने बताया कि इलेक्ट्रॉन की स्थिति कभी बिल्कुल तय नहीं होती। इसका अर्थ यह नहीं कि इलेक्ट्रॉन “अव्यवस्थित” है, बल्कि यह कि प्रकृति स्वयं संभा...

बोहर मॉडल क्यों असफल हुआ?

होम › रसायन विज्ञान हब   ›  बोहर मॉडल बोहर मॉडल क्यों असफल हुआ? – जब परमाणु ने शास्त्रीय भौतिकी को नकार दिया 1913 में जब नील्स बोहर ने परमाणु का अपना मॉडल प्रस्तुत किया, तब यह विज्ञान की दुनिया के लिए एक साहसिक छलांग थी। इससे पहले परमाणु को या तो ठोस गोले की तरह देखा जाता था, या रदरफोर्ड के मॉडल में एक अस्थिर सौर मंडल जैसा। बोहर मॉडल ने पहली बार यह दिखाया कि प्रकृति शास्त्रीय नियमों से नहीं, बल्कि क्वांटम नियमों से चलती है । लेकिन यही मॉडल कुछ ही वर्षों में अपनी सीमाओं के कारण टूटने लगा। यह पोस्ट उसी टूटन की वैज्ञानिक कहानी है। 📌 Table of Contents बोहर मॉडल का जन्म और मूल विचार पहली दरार: हाइड्रोजन से आगे क्यों नहीं? स्पेक्ट्रम की सूक्ष्म संरचना का रहस्य Zeeman और Stark प्रभाव: प्रयोगों की चुनौती डी-ब्रॉग्ली और तरंग–कण द्वैत अनिश्चितता सिद्धांत और कक्षा का अंत बोहर मॉडल का ऐतिहासिक महत्व आगे का रास्ता: क्वांटम यांत्रिकी 1️⃣ बोहर मॉडल का जन्म और मूल विचार रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि शास्त्रीय भौतिकी ...

मानव जीनोम परियोजना

होम › जीवविज्ञान हब   › मानव जीनोम परियोजना   मानव जीनोम परियोजना: जीवन के कोड का रहस्य उजागर STEM Hindi की जीवविज्ञान श्रृंखला का यह अध्याय मानव जीनोम परियोजना और उसके वैज्ञानिक, चिकित्सा और सामाजिक प्रभावों की गहन यात्रा है। विषय-सूची परिचय: जीवन के विशाल कोड की खोज इतिहास और शुरुआत परियोजना के उद्देश्य तकनीकी दृष्टिकोण और विधियाँ सांख्यिकीय और गणितीय पहलू चिकित्सा और अनुसंधान में उपयोग नैतिक और सामाजिक प्रभाव भविष्य की दिशा निष्कर्ष परिचय: जीवन के विशाल कोड की खोज हर मानव की कोशिकाओं में DNA की एक विशाल पुस्तक छुपी है। इस पुस्तक के 3 बिलियन अक्षरों (base pairs) में हमारे शरीर की हर विशेषता लिखी होती है। जीन अभिव्यक्ति ने यह समझाया कि जीन कैसे चालू और बंद होते हैं। अब मानव जीनोम परियोजना ने इस कोड को पूरी तरह से पढ़ने और समझने की चुनौती को स्वीकार किया। यह परियोजना क...

म्यूटेशन: प्रकार और प्रभाव — जीवन के कोड में अदृश्य बदलाव

    म्यूटेशन: प्रकार और प्रभाव — जीवन के कोड में अदृश्य बदलाव यह लेख STEM Hindi जीव विज्ञान केंद्र का हिस्सा है। यदि आपने जीन अभिव्यक्ति पर पिछला विस्तृत लेख नहीं पढ़ा है, तो पहले उसे पढ़ना उपयोगी रहेगा: जीन अभिव्यक्ति: जीवन के गुप्त संगीत की कहानी अन्य संबंधित लेख यहाँ देखें। विषय-सूची जीवन के महान ग्रंथ में एक गलत अक्षर म्यूटेशन क्या है? म्यूटेशन का गणित म्यूटेशन के प्रकार म्यूटेशन के कारण म्यूटेशन के प्रभाव विकासवाद और म्यूटेशन वास्तविक दुनिया में उदाहरण निष्कर्ष: म्यूटेशन—खतरा भी, वरदान भी 1. जीवन के महान ग्रंथ में एक गलत अक्षर कल्पना कीजिए कि जीवन एक महाग्रंथ है—चार अक्षरों A, T, G, C में लिखा हुआ। यदि इस ग्रंथ में किसी एक स्थान पर गलती से एक अक्षर बदल जाए, हट जाए या बढ़ जाए, तो पूरी कहानी बदल सकती है। कभी बदलाव इतना सूक्ष्म होता है कि पता भी नहीं चलता, और कभी इतना गहरा कि पूरा जीव बदल जाता है। यही कहानी है **म्यूटेशन** की। यह शब्...