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VMSM: भारत की वह इलेक्ट्रिक मोटर, जिसे दुर्लभ मृदा चुंबक (Rare Earth Magnet) की ज़रूरत ही नहीं

 

VMSM: भारत की वह इलेक्ट्रिक मोटर, जिसे दुर्लभ मृदा चुंबक (Rare Earth Magnet) की ज़रूरत ही नहीं

अंतिम बार अपडेट किया गया: 15 जुलाई 2026

लगभग हर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की मोटर के अंदर एक बेहद खास तरह का चुंबक छिपा होता है — नियोडाइमियम-आयरन-बोरॉन जैसे दुर्लभ मृदा (rare earth) मैग्नेट। यह चुंबक मोटर को छोटा, हल्का और शक्तिशाली बनाता है, लेकिन इसकी सप्लाई सीमित और महंगी है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप Vimag Labs ने एक ऐसी मोटर डिज़ाइन की है जो बिना किसी स्थायी चुंबक के, सिर्फ तांबे (copper), स्टील और सॉफ्टवेयर-नियंत्रित इलेक्ट्रॉनिक्स से अपना चुंबकीय क्षेत्र खुद बना लेती है। इसे उन्होंने नाम दिया है — वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (VMSM)। आइए समझते हैं कि यह तकनीक इंजीनियरिंग के स्तर पर वास्तव में काम कैसे करती है।

विषय-सूची

पारंपरिक PMSM मोटर कैसे काम करती है

आज लगभग हर EV, परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM) इस्तेमाल करती है। इसके स्टेटर (motor का स्थिर बाहरी हिस्सा) में तीन-फेज़ AC करंट दिया जाता है, जिससे एक घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र (rotating magnetic field) बनता है। रोटर (घूमने वाला भीतरी हिस्सा) में स्थायी चुंबक जड़े होते हैं, जो इस घूमते क्षेत्र के साथ "सिंक्रोनाइज़" होकर घूमने लगते हैं और टॉर्क (घूर्णन बल) पैदा करते हैं। यह डिज़ाइन बहुत ऊर्जा-सघन (energy-dense) है — यानी कम आकार में ज़्यादा शक्ति देता है — इसीलिए यह EV उद्योग की पहली पसंद बना। लेकिन इसकी कीमत है: स्थायी चुंबक बनाने के लिए दुर्लभ मृदा तत्वों की ज़रूरत पड़ती है, और ये चुंबक तेज़ गति व उच्च तापमान पर धीरे-धीरे अपनी चुंबकीय शक्ति भी खो सकते हैं (demagnetization)।

मौजूदा चुंबक-मुक्त विकल्प और उनकी सीमाएँ

दुर्लभ मृदा चुंबक से बचने के इंजीनियरिंग तरीके नए नहीं हैं, लेकिन हर तरीके के साथ कोई-न-कोई समझौता जुड़ा रहा है:

  • इंडक्शन मोटर (Induction Motor): रोटर में कोई चुंबक नहीं होता — चुंबकीय क्षेत्र स्टेटर द्वारा प्रेरित (induced) किया जाता है। यह सरल और भरोसेमंद है (टेस्ला के शुरुआती मॉडल S/X में इस्तेमाल हुई), लेकिन आंशिक लोड पर इसकी दक्षता (efficiency) PMSM से कम रहती है।
  • स्विच्ड रिलक्टेंस मोटर (Switched Reluctance Motor): यह भी चुंबक-मुक्त है और बेहद मज़बूत होती है, लेकिन इसमें टॉर्क में उतार-चढ़ाव (torque ripple) ज़्यादा होता है, जिससे शोर और कंपन की समस्या आती है।
  • वाउंड-रोटर सिंक्रोनस मोटर / एक्सटर्नली एक्साइटेड सिंक्रोनस मोटर (EESM): इसमें रोटर पर भी तार की कुंडली (winding) होती है, जिसमें बाहर से DC करंट भेजकर एक इलेक्ट्रोमैग्नेट बनाया जाता है — चुंबक की ज़रूरत नहीं। लेकिन पारंपरिक डिज़ाइन में यह करंट रोटर तक पहुँचाने के लिए ब्रश और स्लिप-रिंग (घर्षण द्वारा संपर्क बनाने वाले पुर्जे) का इस्तेमाल होता है, जो समय के साथ घिसते हैं और रखरखाव माँगते हैं।

Vimag Labs की VMSM असल में इसी तीसरी श्रेणी — वाउंड-रोटर सिंक्रोनस मोटर — का एक उन्नत रूप है, जो ब्रश और स्लिप-रिंग की समस्या को पूरी तरह हल कर देती है।

VMSM की मूल अवधारणा: "वर्चुअल" चुंबक का मतलब

VMSM में रोटर के अंदर कोई स्थायी चुंबक नहीं, बल्कि तांबे की कुंडलियाँ (coils) होती हैं। इन कुंडलियों में जब DC करंट प्रवाहित होता है, तो वे अस्थायी रूप से एक इलेक्ट्रोमैग्नेट की तरह व्यवहार करती हैं — यानी चुंबकीय क्षेत्र स्थायी वस्तु नहीं, बल्कि एक "सॉफ्टवेयर-नियंत्रित, वास्तविक-समय में बनाया गया" प्रभाव है, इसीलिए नाम है "वर्चुअल मैग्नेट"। स्टेटर की ओर से आने वाला घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र इस वर्चुअल रोटर-चुंबक के साथ बिल्कुल वैसे ही सिंक्रोनाइज़ होता है, जैसे यह किसी स्थायी चुंबक के साथ होता — फर्क सिर्फ इतना है कि इस चुंबकीय क्षेत्र की ताकत और दिशा को कंट्रोल सॉफ्टवेयर वास्तविक समय में बदल सकता है।

रोटरी ट्रांसफार्मर एक्साइटेशन: असली इनोवेशन

असली सवाल यह है: घूमते हुए रोटर की कुंडलियों तक बिजली पहुँचाई कैसे जाए, बिना ब्रश या स्लिप-रिंग के? Vimag Labs का पेटेंट — "A Robust Rotating Transformer Excited Synchronous Motor and Its Control" — इसी सवाल का जवाब है। इसका सिद्धांत है रोटरी ट्रांसफार्मर (rotating transformer): किसी भी सामान्य ट्रांसफार्मर की तरह, इसमें भी एक प्राइमरी वाइंडिंग (स्टेटर की ओर, स्थिर) और एक सेकेंडरी वाइंडिंग (रोटर की ओर, घूमती हुई) होती है, जो एक बेहद छोटे हवा के गैप (air gap) से अलग रहती हैं। फैराडे के विद्युत-चुंबकीय प्रेरण के नियम (Faraday's Law of Electromagnetic Induction) के अनुसार, प्राइमरी में बहने वाला बदलता हुआ करंट, बिना किसी भौतिक संपर्क के, सेकेंडरी में भी करंट प्रेरित (induce) कर देता है — चाहे रोटर कितनी भी तेज़ गति से घूम क्यों न रहा हो।

रोटर की तरफ इस प्रेरित प्रत्यावर्ती धारा (AC) को छोटे रेक्टिफायर सर्किट से DC में बदला जाता है, और यही DC करंट रोटर की कुंडलियों को उत्तेजित (excite) करके "वर्चुअल चुंबक" बनाता है। चूँकि पूरी प्रक्रिया विद्युत-चुंबकीय प्रेरण से होती है, न कि घर्षण वाले संपर्क से, इसमें कोई ब्रश घिसता नहीं, कोई स्पार्किंग नहीं होती, और रखरखाव की ज़रूरत बेहद कम हो जाती है — जबकि फ़ायदा वही मिलता है जो एक पारंपरिक वाउंड-रोटर मोटर से मिलता, यानी रोटर के चुंबकीय क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण।

सॉफ्टवेयर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की भूमिका

स्थायी चुंबक वाली मोटर में चुंबकीय क्षेत्र की ताकत तय — आप उसे न बदल सकते हैं, न बंद कर सकते हैं। VMSM में यह क्षेत्र पूरी तरह प्रोग्राम करने योग्य (programmable) है। नियंत्रण एल्गोरिदम, मोटर की गति और टॉर्क माँग के अनुसार, वास्तविक समय में यह तय करते हैं कि रोटर उत्तेजना धारा (excitation current) कितनी होनी चाहिए। धीमी गति और अधिक टॉर्क चाहिए तो क्षेत्र मज़बूत किया जा सकता है; तेज़ गति पर दक्षता बनाए रखने के लिए क्षेत्र को "कमज़ोर" (field weakening) किया जा सकता है — यह ठीक वही तकनीक है जो इंजीनियर पारंपरिक वाउंड-फील्ड मोटरों में दशकों से इस्तेमाल करते आए हैं, बस अब यह ब्रश-रहित और पूरी तरह सॉफ्टवेयर-नियंत्रित है।

तुलना तालिका: चार मोटर तकनीकें आमने-सामने

तकनीकचुंबक ज़रूरी?ब्रश/स्लिप-रिंग?मुख्य सीमा
PMSMहाँ (दुर्लभ मृदा)नहींचुंबक आपूर्ति व लागत, उच्च ताप पर demagnetization
इंडक्शन मोटरनहींनहींआंशिक लोड पर कम दक्षता
स्विच्ड रिलक्टेंसनहींनहींटॉर्क रिपल, शोर व कंपन
पारंपरिक वाउंड-रोटर (brushed)नहींहाँब्रश घिसाव, रखरखाव
VMSM (Vimag Labs)नहींनहीं (रोटरी ट्रांसफार्मर)अतिरिक्त पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, अभी शुरुआती चरण में

इंजीनियरिंग फायदे: दक्षता, विश्वसनीयता, लचीलापन

  • कोई demagnetization जोखिम नहीं: चूँकि चुंबकीय क्षेत्र सक्रिय रूप से बनाया जाता है, स्थायी चुंबक की तरह उच्च तापमान पर इसके कमज़ोर पड़ने का खतरा नहीं रहता।
  • ब्रश-रहित, कम रखरखाव: रोटरी ट्रांसफार्मर एक्साइटेशन से यांत्रिक घिसाव वाले पुर्जे हट जाते हैं।
  • पूरे स्पीड रेंज पर बेहतर नियंत्रण: सॉफ्टवेयर द्वारा फील्ड-वीकनिंग की सुविधा से मोटर कम और ज़्यादा गति, दोनों पर दक्षता बनाए रख सकती है।
  • ओवर-द-एयर अपडेट की संभावना: चूँकि मोटर का व्यवहार काफी हद तक सॉफ्टवेयर से तय होता है, भविष्य में प्रदर्शन सुधार संभावित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट के ज़रिए भी किए जा सकते हैं — कंपनी के अनुसार।

तकनीकी चुनौतियाँ जो अभी बाकी हैं

यह याद रखना ज़रूरी है कि VMSM अभी पायलट-परीक्षण के चरण में है, बड़े पैमाने पर उत्पादन में नहीं। रोटर की कुंडलियों और रोटरी ट्रांसफार्मर में ऊर्जा हानि के कारण गर्मी पैदा होती है, इसलिए थर्मल मैनेजमेंट (ताप प्रबंधन) एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती बना हुआ है, खासकर उच्च-प्रदर्शन वाले वाहनों में। साथ ही, पारंपरिक PMSM की तुलना में अतिरिक्त पावर इलेक्ट्रॉनिक्स (रेक्टिफायर सर्किट, नियंत्रण चिप) जुड़ने से शुरुआती लागत और सिस्टम जटिलता भी बढ़ती है, हालांकि कंपनी का दावा है कि एक कस्टम चिप के ज़रिए भविष्य में यह लागत काफी घटाई जा सकती है।

कंपनी के बारे में संक्षेप में

Vimag Labs की स्थापना 2025 में हुई। सह-संस्थापक और CEO मनीष सेठ के अनुसार, इस तकनीक का विचार 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान तब आया जब प्रोटोटाइप मोटर के लिए ज़रूरी चुंबकों की एक खेप शंघाई पोर्ट पर लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण करीब तीन महीने तक अटकी रही। कंपनी को अब तक पाँच भारतीय पेटेंट मिल चुके हैं, और उसने Accel के नेतृत्व में 5 मिलियन डॉलर की सीरीज़-A फंडिंग जुटाई है। उत्पादन के लिए Jendamark के साथ एक विनिर्माण समझौता भी हुआ है, और फिलहाल कई दोपहिया, तिपहिया व यात्री वाहन निर्माताओं के साथ पायलट परीक्षण चल रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

VMSM मोटर में चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?

रोटर की तांबे की कुंडलियों में DC करंट भेजकर, जो उन्हें अस्थायी रूप से इलेक्ट्रोमैग्नेट बना देता है — इसीलिए इसे "वर्चुअल मैग्नेट" कहा जाता है।

रोटर तक बिजली बिना ब्रश के कैसे पहुँचती है?

रोटरी ट्रांसफार्मर के ज़रिए, जो विद्युत-चुंबकीय प्रेरण (फैराडे के नियम) का उपयोग करके बिना भौतिक संपर्क के स्टेटर से रोटर तक ऊर्जा स्थानांतरित करता है।

क्या VMSM, इंडक्शन मोटर जैसी ही है?

नहीं। इंडक्शन मोटर में रोटर का चुंबकीय क्षेत्र परोक्ष रूप से प्रेरित होता है और सीधे नियंत्रित नहीं किया जा सकता, जबकि VMSM में रोटर उत्तेजना धारा को सॉफ्टवेयर द्वारा सीधे नियंत्रित किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे एक वाउंड-फील्ड सिंक्रोनस मोटर में होता है।

क्या यह तकनीक अभी वाहनों में इस्तेमाल हो रही है?

फिलहाल यह पायलट-परीक्षण चरण में है, विभिन्न दोपहिया, तिपहिया और यात्री वाहन निर्माताओं के साथ, बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन अभी शुरू नहीं हुआ है।

निष्कर्ष में, VMSM दिखाती है कि सही जगह पर लगाई गई पुरानी इंजीनियरिंग अवधारणाएँ — ट्रांसफार्मर सिद्धांत, वाउंड-फील्ड मोटर — आधुनिक पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर के साथ मिलकर एक बिल्कुल नई समस्या का व्यावहारिक हल बन सकती हैं। यह भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा का एक बेहतरीन उदाहरण है, भले ही इसे बड़े पैमाने पर सफल साबित होने के लिए अभी कुछ वर्षों की परीक्षा और बाकी हो।

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