आधुनिक हवाई युद्ध और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के इस दौर में, किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता उसकी उन्नत सर्विलांस और रडार प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भर करती है। भारत ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व छलांग लगाई है। इसी दिशा में 'विरुपाक्ष एईएसए रडार' (Virupaksha AESA Radar) का विकास किया गया है। यह अत्याधुनिक एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (AESA) रडार प्रणाली भारतीय वायु सेना (IAF) की रीढ़ बनने जा रही है, विशेषकर इसे आगामी सुखोई Su-30MKI के आधुनिकीकरण कार्यक्रम (Super Sukhoi Program) और अन्य प्रमुख विमान प्लेटफार्मों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह लेख विरुपाक्ष रडार की तकनीकी वास्तुकला, इसकी कार्यप्रणाली, DRDO के योगदान और भारतीय रक्षा परिदृश्य पर इसके व्यापक प्रभावों का गहन तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत करता है। विषय सूची (Table of Contents) 1. विरुपाक्ष एईएसए रडार का परिचय और रणनीतिक पृष्ठभूमि 2. एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (AESA) तकनीक की मूल वास्तुकला 3. DRDO और भारतीय रक्षा प्रौद्योग...